चीन सीमा पर पांडव नृत्य, जादुंग पहुंच भावुक हुए जाड़ समुदाय के लोग, नेलांग को भी बसाने की मांग

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चीन सीमा पर स्थित पैतृक गांव जादुंग, नेलांग पहुंचे जाड़ समुदाय के लोग, पांडव नृत्य के साथ किया देवथात और भगवती मंदिर में विशेष अनुष्ठान

उत्तरकाशी: भारत-चीन सीमा से सटे ऐतिहासिक जादुंग और नेलांग गांवों में जाड़ समुदाय के आराध्य लाल देवता की वार्षिक पूजा और पारंपरिक पांडव नृत्य का भव्य आयोजन हुआ. वर्षों बाद अपने पैतृक गांव जादुंग की धरती पर पहुंचकर बगोरी के ग्रामीण भावुक हो उठे. इस दौरान उन्होंने जादुंग की तर्ज पर नेलांग गांव को भी दोबारा बसाने और क्षेत्र से इनर लाइन परमिट की बाध्यता समाप्त करने की मांग उठाई.

लाल देवता की वार्षिक पूजा की धूम: रिंगाली देवी की देवडोली के साथ बगोरी गांव के जाड़ समुदाय के लोग एक दिवसीय प्रवास पर नेलांग और जादुंग पहुंचे. नेलांग में लाल देवता मंदिर और देवथात में विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों का पूजन किया गया. इसके बाद पारंपरिक पांडव नृत्य ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय और सांस्कृतिक रंग में रंग दिया. जादुंग गांव में भी देवथात और भगवती मंदिर में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए.

सेना और आईटीबीपी के जवानों ने किया ग्रामीणों का स्वागत: रिंगाली देवी की देवडोली के साथ ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में रासो-तांदी नृत्य प्रस्तुत कर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया. सेना और आईटीबीपी के जवानों ने ग्रामीणों का गर्मजोशी से स्वागत किया. ग्रामीणों ने जादुंग में विकसित हो रहे होमस्टे और अन्य सुविधाओं का भी अवलोकन किया.

नेलांग को दोबारा बसाने की मांग: बगोरी गांव की ग्राम प्रधान रणजीता डोगरा, भवान सिंह राणा, जाड़ भोटिया जन कल्याण समिति के अध्यक्ष इंद्र सिंह नेगी और जसपाल रावत ने कहा कि जिस तरह सरकार जादुंग को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रही है, उसी तरह नेलांग गांव को भी दोबारा बसाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए. उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री इस संबंध में घोषणा कर चुके हैं, लेकिन अभी तक जमीन पर अमल नहीं हो पाया है.

मूल निवासियों को इनर लाइन बाध्यता में छूट देने की मांग: ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अपने ही पैतृक गांव पहुंचने के लिए उन्हें कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इसलिए सीमा क्षेत्र में रहने वाले मूल निवासियों को राहत देते हुए इनर लाइन की बाध्यताओं को समाप्त किया जाना चाहिए.

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