वापस नहीं लिया जाएगा E20 पेट्रोल का रोलआउट, फिलहाल 20 प्रतिशत से ज्यादा मिश्रण नहीं

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भारत सरकार ने इस बात की पुष्टि की है कि वह 20 इथेनॉल मिश्रण से आगे नहीं बढ़ेगी और अभी ऐसी कोई योजना नहीं है.

हैदराबाद: केंद्र सरकार से इस बात की पुष्टि की है कि उसकी पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा को मौजूदा 20 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. बता दें कि लंबे समय से इस बात पर विवाद चला आ रहा है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से फ्यूल की क्षमता और गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और साथ ही इंजन के कंपोनेंट्स भी खराब हो रहे हैं.

वहीं दूसरी ओर लोगों के बीच पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण और बढ़ाने की आशंकाओं की भी चर्चा हो रही है, जिसके बाद अब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इस बात की पुष्टि की है कि सरकार की अभी पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण 20 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ाने की कोई योजना नहीं है.

20 प्रतिशत इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल, जिसे आमतौर पर E20 फ्यूल कहा जाता है, पिछले साल के आखिर में भारत के 90,000 पेट्रोल पंपों पर बिकने वाला स्टैंडर्ड फ़्यूल बन गया. इससे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कार बाज़ार में गाड़ी चलाने वालों के बीच काफ़ी हंगामा बना हुआ है. फ्यूल को लेकर कई गाड़ी मालिकों ने शिकायत की कि उन्हें फ़्यूल की माइलेज और गाड़ी की परफ़ॉर्मेंस में कमी महसूस हो रही है.

वहीं, कुछ लोगों ने E20 की वजह से गाड़ी के ज़रूरी पार्ट्स के खराब होने की भी शिकायत की है. बता दें कि कुछ समय पहले ही सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाने की योजना का संकेत दिया है, जिसके बाद से गाड़ी मालिकों की तरफ़ से इसकी कड़ी आलोचना होने लगी.

लोगों की इस चिंता पर राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए राज्य मंत्री गोपी ने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण बढ़ाने का कोई भी फ़ैसला विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन तथा स्टेकहोल्डर्स (जैसे कार बनाने वाली कंपनियां, फ़्यूल रिटेलर्स और फ़ीडस्टॉक सप्लायर्स) के साथ बातचीत के बाद ही लिया जाएगा.

E20 को वापस नहीं लिया जाएगा
केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण तुरंत नहीं बढ़ा रही है. साथ ही, गोपी ने यह भी बताया कि मौजूदा स्टैंडर्ड फ्यूल E20 से वापस E10 या शुद्ध पेट्रोल पर जाने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बेहतर फ्यूल की ओर आगे बढ़ना चाहती है.

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार को E20 के इस्तेमाल से जुड़ी गाड़ियों की परफॉर्मेंस घटने, इंजन खराब होने, जंग लगने और फ्यूल पंप की समस्याओं के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने यह भी कहा कि E10 के लिए बनी गाड़ियों में E20 का इस्तेमाल करने पर फ्यूल एफिशिएंसी में सिर्फ़ 3-5 प्रतिशत की मामूली कमी आती है.

उन्होंने कहा कि, “अगर इथेनॉल मिलाने से इंजन या फ्यूल सिस्टम को कोई बड़ा नुकसान होता, तो ऐसी खराबी की वजह से बड़े पैमाने पर वारंटी क्लेम, सर्विस कैंपेन और ग्राहकों की बहुत सारी शिकायतें सामने आतीं, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है.”

राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए गोपी ने कहा कि, “20 करोड़ से ज़्यादा दो-पहिया वाहन और 3 करोड़ से ज़्यादा पेट्रोल कारें – जिनमें E20 सर्टिफ़िकेशन से पहले बनी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियां भी शामिल हैं – इन ईंधनों पर चल रही हैं. इथेनॉल मिलाने की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या गाड़ी के खराब होने का कोई भी प्रमाणित सबूत नहीं मिला है.”

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