कॉर्बेट पार्क का ढिकाला जोन आज से पर्यटकों के लिए हुआ बंद, नाइट स्टे और पर्यटन गतिविधियों पर लगेगा विराम

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मानसून के मद्देनजर आज से ढिकाला जोन सैलानियों के लिए बंद हो गया है. 15 नवंबर से फिर जोन को खोला जाएगा.

रामनगर: जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के सबसे लोकप्रिय पर्यटन क्षेत्रों में शामिल ढिकाला जोन में 15 जून यानि आज से पर्यटन गतिविधियों पर विराम लग जाएगा. मानसून सीजन को देखते हुए हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कॉर्बेट प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर ढिकाला जोन को आगामी 15 नवंबर तक बंद करने का निर्णय लिया है. 14 जून को रात्रि विश्राम के लिए गए पर्यटक जब 15 जून यानि आज वापस लौटेंगे, उसके बाद इस जोन में पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाएगी.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. इनमें भी ढिकाला जोन सबसे अधिक लोकप्रिय माना जाता है, विशाल घास के मैदान, रामगंगा नदी का मनमोहक दृश्य, घने जंगल और वन्यजीवों की प्रचुरता इस क्षेत्र को पर्यटकों के बीच विशेष पहचान दिलाती है. हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले बड़ी संख्या में पर्यटक यहां जंगल सफारी और रात्रि विश्राम का अनुभव लेने पहुंचते हैं.

मानसून सीजन के दौरान जंगलों के भीतर बहने वाले बरसाती नाले और कच्चे मार्ग अचानक उफान पर आ जाते हैं. कई स्थानों पर जलभराव और मार्ग क्षतिग्रस्त होने की आशंका रहती है. जिससे पर्यटकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. इसी कारण कॉर्बेट प्रशासन प्रत्येक वर्ष मानसून के दौरान प्रमुख पर्यटन जोनों को अस्थायी रूप से बंद कर देता है.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 15 जून से ढिकाला जोन को बंद किया जा रहा है. इसके साथ ही विभिन्न पर्यटन जोनों में उपलब्ध रात्रि विश्राम की सुविधाएं भी 15 जून यानि आज बंद कर दी जाएंगी. यह व्यवस्था आगामी 15 नवंबर तक लागू रहेगी, जिसके बाद मौसम अनुकूल होने पर इन सुविधाओं को दोबारा शुरू किया जाएगा. ढिकाला जोन में पर्यटकों के लिए लगभग 30 कमरों की व्यवस्था उपलब्ध है.

इसके अलावा यहां 12 डॉरमेट्री बेड की सुविधा भी मौजूद है. वहीं गैरल परिसर में 6 कमरे और 8 डॉरमेट्री बेड उपलब्ध कराए जाते हैं, सुल्तान और मलानी में 2-2 कमरे पर्यटकों के लिए आरक्षित रहते हैं. इसके अतिरिक्त बिजरानी जोन में 7 कमरे, ढेला में 2 कमरे, झिरना में 4 कमरे, पाखरो में 2 कमरे तथा सोना नदी क्षेत्र में भी 2 कमरों की सुविधा पर्यटकों को प्रदान की जाती है,हालांकि 15 जून से इन सभी स्थानों पर रात्रि विश्राम की सुविधा बंद कर दी जाएगी.

कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार मानसून के दौरान मुख्य रूप से उन क्षेत्रों को बंद किया जाता है जहां सड़कें और वन मार्ग बारिश से अधिक प्रभावित होते हैं. ढिकाला जोन जंगल के भीतर काफी गहराई में स्थित है और यहां पहुंचने के लिए कई बरसाती नालों और वन मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है. ऐसे में भारी बारिश के दौरान यहां पर्यटकों की आवाजाही जोखिमपूर्ण हो सकती है.

हालांकि मानसून सीजन में भी पर्यटकों के लिए पूरी तरह से जंगल सफारी बंद नहीं होगी. डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि पर्यटक इस दौरान झिरना, ढेला और गार्जिया जोनों में डे सफारी का आनंद ले सकेंगे. ये जोन सामान्य परिस्थितियों में पूरे वर्ष संचालित किए जाते हैं. वहीं बिजरानी जोन 30 जून तक पर्यटकों के लिए खुला रहेगा, जिसके बाद इसे भी मानसून के कारण बंद कर दिया जाएगा. इसके पश्चात मुख्य रूप से झिरना, ढेला और गार्जिया जोनों में ही सफारी गतिविधियां जारी रहेंगी.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा होती है और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो इन जोनों को भी अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है. मौसम और जंगल के हालात के आधार पर समय-समय पर निर्णय लिया जाएगा. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की यह वार्षिक व्यवस्था वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर लागू की जाती है. मानसून के दौरान जंगलों को प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित होने का अवसर भी मिलता है. ऐसे में आगामी पांच महीनों तक ढिकाला सहित कई प्रमुख पर्यटन जोनों में सन्नाटा रहेगा और 15 नवंबर से एक बार फिर कॉर्बेट के जंगल पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार होते नजर आएंगे

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