3 जून को सेवानिवृत्त होंगे न्यायाधीश आशीष नैथानी, सुनाए ये ऐतिहासिक फैसले

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न्यायाधीश आशीष नैथानी ने कई अहम फैसलों से न्यायपालिका को नई ऊंचाइयां दी. नैनीताल में उनके सेवानिवृत्त पर कार्यक्रम रखा गया है.

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशीष नैथानी 3 जून को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं. न्यायाधीश आशीष नैथानी की सेवानिवृत्ति के अवसर पर एक ‘फुल कोर्ट रेफरेंस’ (विदाई समारोह) का आयोजन किया जाएगा. दोपहर 3:30 बजे यह कार्यक्रम मुख्य न्यायाधीश की अदालत में आयोजित किया जाएगा. कार्यक्रम में हाईकोर्ट के न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी व तमाम अधिवक्ता उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई देंगे.

उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आशीष नैथानी 3 जून को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं. प्रथम जिला जज से पदोन्नत होकर 9 जनवरी 2025 को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए न्यायमूर्ति नैथानी का कार्यकाल करीब डेढ़ वर्ष का रहा, जिसमें उन्होंने न्यायपालिका की गरिमा को नई ऊंचाइयां दी. अपने इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जटिल और संवेदनशील मामलों पर सुनवाई करते हुए ऐसे फैसले सुनाए, जो न केवल कानूनी मिसाल बने बल्कि वादकारियों के अधिकारों के रक्षक भी साबित हुए.

​न्यायमूर्ति नैथानी ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि किसी कथित अपराधी से केवल रिश्तेदारी होना संपत्ति कुर्क करने का आधार नहीं हो सकता. उन्होंने गैंगस्टर एक्ट के तहत हरिद्वार जिला मजिस्ट्रेट के कुर्की के आदेशों को रद्द करते हुए कानून और साक्ष्यों की मजबूती पर बल दिया. इसके अतिरिक्त, एक आर्मी जवान के विरुद्ध दुष्कर्म के मामले को निरस्त करते हुए उन्होंने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि आपसी सहमति से बने संबंधों में शादी से इनकार करना स्वतः ही दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता और आपराधिक कानून का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

​सामाजिक न्याय और प्रशासनिक पारदर्शिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एम्स ऋषिकेश भ्रष्टाचार मामले और विकासनगर की बस्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई जैसे फैसलों में भी दिखाई दी. जहां एक ओर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपी प्रोफेसर की याचिका खारिज कर जांच का मार्ग प्रशस्त किया, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाकर गरीबों को सुनवाई का अवसर प्रदान किया. किच्छा डकैती कांड और पॉक्सो अधिनियम जैसे मामलों में साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के माध्यम से उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि न्याय केवल अनुमानों पर नहीं, बल्कि ठोस प्रमाणों पर आधारित हो.

हाईकोर्ट में वर्क चार्ज वाले कर्मचारियों के मामले में सुनवाई: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में कार्यरत वर्क चार्ज कर्मचारियों के द्वारा पूर्व में दैनिक श्रमिक के रूप में की गई सेवाओं को पेंशन, ग्रेच्युटी व अन्य लाभों के लिए विभाग के द्वारा न जोड़ने के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने याचिकाओं को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे इस सम्बंध में अपना एक नया प्रयावेदन दो सप्ताह के भीतर सम्बन्धित अधिकारी को दें.

अनियमितता मामले में भी हुई सुनवाई: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वर्गाश्रम नगर पंचायत जोंक, योमकेशकर जिला पौड़ी गढ़वाल में हुए करोड़ों की अनियमितताओं के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार समेत नगर पंचायत से तीन सप्ताह के भीतर स्थिति से अवगत कराने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है.

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