उत्तराखंड: कॉर्बेट फाटो पर्यटन जोन के प्रसिद्ध ‘भोला टाइगर’ ने ली अंतिम सांस, शांत स्वभाव की वजह से पड़ा ये नाम

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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के फाटो पर्यटन जोन के प्रसिद्ध भोला टाइगर की इलाज के दौरान मौत हो गई है.

रामनगर (उत्तराखंड): कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के फाटो पर्यटन जोन के प्रसिद्ध भोला टाइगर की मौत हो गई है. भोला टाइगर को फाटो रेंज से करीब दो महीने पहले गंभीर रूप से घायल अवस्था में रेस्क्यू कर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर लाया गया था. यह वही बाघ था, जिसे फाटो पर्यटन जोन में नेचर गाइड, जिप्सी चालक और स्थानीय लोग प्यार से भोला टाइगर के नाम से जानते थे. भोला की मौत की खबर सामने आते ही वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में मायूसी छा गई.

बताया गया कि इस वयस्क नर बाघ को 26 जून 2026 को गंभीर रूप से घायल अवस्था में फाटो रेंज से रेस्क्यू कर ढेला रेस्क्यू सेंटर लाया गया था. रेस्क्यू के समय उसकी शारीरिक स्थिति बेहद खराब थी. इसके बाद पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसका लगातार उपचार किया जा रहा था. वन विभाग की ओर से उसकी हालत को देखते हुए हरसंभव चिकित्सा और देखभाल उपलब्ध कराई गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उपचार के दौरान भोला टाइगर ने दम तोड़ दिया. भोला टाइगर फाटो पर्यटन जोन में खासा चर्चित था. उसका स्वभाव बेहद शांत और भोला था, वह अक्सर पर्यटकों को लेकर जंगल में पहुंचने वाली जिप्सियों के आसपास शांत होकर बैठ जाता था और जिप्सियों की मौजूदगी के बावजूद आक्रामक व्यवहार नहीं करता था.

इसी शांत और भोले स्वभाव के चलते नेचर गाइड और जिप्सी चालकों ने उसका नाम भोला रख दिया था. देखते ही देखते वह फाटो पर्यटन जोन में ‘भोला टाइगर’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया. भोला की मौत के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत ढेला रेस्क्यू सेंटर में पशु चिकित्साधिकारियों के गठित पैनल ने उसके शव का पोस्टमार्टम किया. यह कार्रवाई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार की गई. पोस्टमार्टम के दौरान वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, संबंधित विशेषज्ञ संस्थाओं और एनजीओ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.

पोस्टमार्टम के दौरान बाघ के आवश्यक जैविक नमूने एकत्र किए गए हैं. इन नमूनों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून भेजा गया. जांच रिपोर्ट के आधार पर बाघ की मौत के कारणों से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिलेगी. शव-विच्छेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद NTCA की गाइडलाइन के अनुसार बाघ के शव का विधिवत दहन कर निस्तारण कर दिया गया.

टाइगर की मौत के बाद वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सभी निर्धारित प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन किया गया है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की गाइडलाइन के अनुसार बाघ का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में कराया गया. पोस्टमार्टम के दौरान बाघ के स्वास्थ्य, चोटों और मृत्यु के संभावित कारणों से जुड़े सभी पहलुओं की वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई.
-डॉ. साकेत बडोला, निदेशक,कॉर्बेट टाइगर रिजर्व-

इस दौरान कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उप निदेशक राहुल मिश्रा, वन विभाग के अधिकारी, वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी, WWF, NTCA और द कॉर्बेट फाउंडेशन के प्रतिनिधियों सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे. वन विभाग के अनुसार, उपचार के दौरान बाघ की गंभीर स्थिति को देखते हुए लगातार आवश्यक चिकित्सा और स्वास्थ्य निगरानी की गई. पूरी प्रक्रिया में निर्धारित वन्यजीव प्रबंधन प्रोटोकॉल और पारदर्शिता का पालन किया गया, ताकि भोला टाइगर की मौत के कारणों की वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित हो सके.

फाटो पर्यटन जोन में अपनी शांत फितरत और जिप्सियों के आसपास बेखौफ मौजूदगी के लिए पहचाने जाने वाला भोला टाइगर अब जंगल की यादों का हिस्सा बन गया है. नेचर गाइड और जिप्सी चालकों के बीच उसकी पहचान लंबे समय तक याद की जाएगी.

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