देहरादून के सुलभ शौचालय पर कांग्रेस का कब्जा! रोका जनता का रास्ता, सरकारी फंड के दुरुपयोग पर सिस्टम की चुप्पी

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प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजपुर रोड पर एमडीडीए ने बनवाया था सुलभ शौचालय, कांग्रेस ने दीवार खड़ी करके रोका जनता का रास्ता

देहरादून: राजनेताओं और राजनीतिक दलों के यूं तो तमाम विवादित मामले जनता के बीच उनकी फजीहत कराते रहे हैं, लेकिन इस बार देहरादून से जो मुद्दा सुर्खियों में आया है, वो कांग्रेस के लिए गले की हड्डी बन सकता है. बात सरकारी पैसे से बने सुलभ शौचालय से जुड़ी है, जो जनता की सहूलियत के लिए बनाया गया. लेकिन इसकी सुविधा सिर्फ राष्ट्रीय पार्टी के नेता और कार्यकर्ता को मिली. ऐसा क्यों हुआ और क्या है कांग्रेस मुख्यालय में सुलभ शौचालय का मामला, इस रिपोर्ट में जानिए…

कांग्रेस के पंजे में देहरादून का सुलभ शौचालय: कांग्रेस के पंजे ने सुलभ शौचालय को पूरी तरह से जकड़ लिया है. स्थिति यह है कि आमजन चाहे भी तो इसकी सुविधा लेने की सोच नहीं सकता. ऐसा इसलिए क्योंकि शौचालय में दीवारें और बोर्ड तो हैं, लेकिन इसमें जाने का कोई रास्ता ही नजर नहीं आता. बात कांग्रेस मुख्यालय से सटे सुलभ शौचालय की हो रही है, जिसे सरकारी बजट से बनाया गया लेकिन टैक्स देने वाली जनता इसका इस्तेमाल ही नहीं कर पाई.

सरकारी फंड से मिली नेताओं को सहूलियत: देहरादून में उत्तराखंड कांग्रेस का मुख्यालय मौजूद है, जहां हर दिन पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का आना-जाना लगा रहता है. कांग्रेस भवन राजपुर रोड पर मौजूद है, इसलिए शहर के सबसे व्यस्ततम मुख्य मार्गो में शामिल इस जगह की अपनी खास अहमियत भी है. यही नहीं राजधानी में तमाम बड़े ब्रैंड और अहम संस्थान भी इस क्षेत्र में मौजूद है. जाहिर है कि यह सब व्यापारिक प्रतिष्ठान और बाजार होने के कारण इस क्षेत्र में लोगों की आवाजाही काफी ज्यादा रहती है. शायद यही वजह है कि मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने यहां पर आम जनता के लिए सुलभ शौचालय बनाने का विचार किया होगा, ताकि यहां गुजरने वालों को इसकी सुविधा मिल सके.

कांग्रेस की संपत्ति बना सुलभ शौचालय: कांग्रेस भवन के सामने राजपुर रोड है, तो बगल वाली सड़क नेशविला मार्ग को जाती है. बस इसी नेशविला मार्ग पर ही कांग्रेस भवन से सटा हुआ सुलभ शौचालय भी है, जिसे कांग्रेस के नेताओं की सहमति से ही यहां बनवाया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि इसका पिछला भाग कांग्रेस भवन की जमीन पर है और आगे का हिस्सा सरकारी जमीन पर. लेकिन यह तब की बात है जब इसका निर्माण करवाया गया था. अब तो पूरी तरह से यह कांग्रेस की ही संपत्ति बन चुका है.

सुलभ शौचालय के आगे दीवार बनाकर जनता के लिए बंद किया रास्ता: दरअसल मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने सुलभ शौचालय का निर्माण भी किया और जनता की सुविधा के लिए इसके दरवाजे भी खोल दिए. लेकिन ये ज्यादा समय तक नहीं चला और फिर दीवार बनाकर इसके दरवाजे जनता के लिए बंद कर दिए गए. अब सुलभ शौचालय के नाम पर मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण का बोर्ड भी दिखता है और सुलभ शौचालय की दीवारें भी लेकिन जनता को इसमें जाने का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता.

एमडीडीए उपाध्यक्ष को नहीं है जानकारी: इस मामले पर ईटीवी भारत ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी से बात की तो उन्होंने कहा कि-

एक सुलभ शौचालय कांग्रेस भवन के करीब बनाया गया था, लेकिन इसे बंद करवा दिया गया है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. इस मामले में अधिकारियों को निर्देश देते हुए वहां के हालात की जानकारी ली जाएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
-बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण-

कांग्रेस बोली हमारी गलती नहीं: हालांकि इस मामले में कांग्रेस के अपने अलग तर्क हैं. कांग्रेस का कहना है कि-

यह कांग्रेस की संपत्ति पर बना था, लेकिन इस पर साफ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई. इसलिए यह कांग्रेस की गलती नहीं बल्कि नगर निगम और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की गलती है.
-शीशपाल गुसाईं, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस-

दीवार बनाने का कांग्रेस के पास जवाब नहीं: इस मामले में कांग्रेस के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि आखिरकार यह दीवार क्यों बनाई गई. हालांकि वह साफ सफाई न होने का हवाला जरूर देते हैं, लेकिन यदि ये बात भी थी तो यहां साफ सफाई के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए थी. ना कि दीवार बनाकर सरकारी शौचालय पर कब्जा करने की.

विधायक ने कांग्रेस के कृत्य को बताया गलत: इस मामले में देहरादून के राजपुर क्षेत्र से विधायक और सरकार में मंत्री खजान दास कहते हैं कि-

जिस तरह से सुलभ शौचालय को बंद करने का काम किया गया है, वह बिल्कुल गलत है. चाहे वह कोई भी राजनीतिक दल हो, उसे इस तरह का कदम नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि इससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
-खजानदास, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार-

कांग्रेस का पर्सनल बना सुलभ शौचालय: फिलहाल कांग्रेस भवन में बाहर से दीवार लगाकर सुलभ शौचालय को बंद कर दिया गया है. कांग्रेस भवन के अंदर जाकर इस सुलभ शौचालय का उपयोग कांग्रेस के लोग अब भी कर रहे हैं. यानी जो सरकारी पैसा टैक्स देने वाली जनता के लिए सुलभ शौचालय बनाकर खर्च किया गया, उसकी सुविधा कांग्रेस के कार्यकर्ता ले रहे हैं.

सरकारी सिस्टम का भी ढीलापन: यह साफ है कि जनता के लिए सुलभ शौचालय का निर्माण किया गया, लेकिन इसका फायदा कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता उठा रहे हैं. उधर राष्ट्रीय दल का दबदबा इतना है कि सरकारी सुलभ शौचालय के अवैध रूप से बंद होने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही. बात भले ही सुलभ शौचालय की हो, लेकिन यह स्थिति सरकारी सिस्टम के ढीलेपन और राजनीतिक दलों की जनता के प्रति दायित्व निभाने की कम होती सोच को बयां करती है.

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