मौत को हरा जिंदगी की जंग जीती ‘मालिनी’, अब करती है अठखेलियां, जानिए इस हथिनी की कहानी

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कभी नदी में बहकर चट्टानों के बीच फंसी थी मासूम हथिनी, आज कालागढ़ एलीफेंट सेंटर की बनी शान, विश्व हाथी दिवस पर पढ़िए खास खबर

रामनगर: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की पहचान देश-दुनिया में बाघों के संरक्षण के लिए है. लेकिन यह क्षेत्र हाथियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी अपनी अलग पहचान रखता है. कॉर्बेट और आसपास के जंगलों में काफी संख्या में जंगली हाथियों की मौजूदगी है. यहां 1,226 से ज्यादा हाथी और 260 से ज्यादा बाघ मौजूद हैं. वहीं, कॉर्बेट प्रशासन की ओर से 13 पालतू हाथियों को विभागीय कार्यों के लिए भी को रखा गया है.

इसी संरक्षण व्यवस्था का एक भावुक उदाहरण कालागढ़ स्थित एलीफेंट सेंटर में देखने को मिलता है. जहां ‘मालिनी’ नाम की हथिनी कभी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी, लेकिन आज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी मासूम अठखेलियों से हर किसी का ध्यान खींच रही है. ऐसे में आज विश्व हाथी दिवस 2026 के मौके पर आपको ‘मालिनी’ से रूबरू करवाते हैं. कैसे उसकी जान बचाई गई और अभी कैसी है उसकी हालत?

बता दें कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व शिवालिक एलीफेंट रिजर्व का भी हिस्सा है. कालागढ़ स्थित एलीफेंट सेंटर में रेस्क्यू किए गए हाथियों की देखभाल और उपचार भी किया जाता है. इसी सेंटर में मालिनी की कहानी वन विभाग की टीम की मेहनत, संवेदनशीलता और सफल रेस्क्यू अभियान की मिसाल बन चुकी है.

मालन नदी में बहकर पहुंची थी नन्ही हथिनी: दरअसल, पिछले साल कोटद्वार के पास मालन नदी में एक हाथी का बच्चा बहकर आ गया था. यह नन्ही हथिनी अपने झुंड से बिछड़ गई थी और नदी के तेज बहाव के बीच चट्टानों के बीच फंस गई थी. स्थानीय स्तर पर इसकी सूचना वन विभाग को मिली तो वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची. स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि हाथी का बच्चा गंभीर रूप से घायल था.

उसकी हालत बेहद नाजुक बताई जा रही थी. कॉर्बेट पार्क की टीम ने काफी मशक्कत के बाद नन्ही हथिनी को सुरक्षित बाहर निकाला. रेस्क्यू के दौरान उसके शरीर पर कई घाव थे और वो काफी कमजोर थी. इसके बाद उसे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ स्थित एलीफेंट सेंटर लाया गया. जहां महावतों, वनकर्मियों और वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी की निगरानी में उसका उपचार शुरू किया गया.

इलाज और देखभाल से बदली मालिनी की जिंदगी: कालागढ़ एलीफेंट सेंटर में मालिनी के लिए लगातार विशेष देखभाल की गई. उसकी सेहत पर नजर रखी गई और आवश्यक उपचार दिया गया. वनकर्मियों और महावतों की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा. जिससे गंभीर हालत में सेंटर पहुंची नन्ही हथिनी के स्वास्थ्य में लगातार सुधार होने लगा.

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने किया था नामकरण: कुछ महीने पहले सूबे के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस हाथी के बच्चे का नामकरण ‘मालिनी’ किया था. आज मालिनी पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य रूप से गतिविधियां कर रही है. कभी जिस हथिनी की जिंदगी बचाना चुनौती बना हुआ था.

वहीं, अब कालागढ़ एलीफेंट सेंटर में खुशी से इधर-उधर घूमती और खेलती नजर आती है. मालिनी की अठखेलियां सेंटर में आने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. उसे देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि कुछ समय पहले यही हथिनी गंभीर हालत में रेस्क्यू कर यहां लाई गई थी.

महावत रूपम और मालिनी की खास बॉन्डिंग: मालिनी के स्वस्थ होने की कहानी में उसके महावत रूपम की भूमिका भी बेहद खास है. कालागढ़ एलीफेंट कैंप में इन दिनों मालिनी और उसके महावत रूपम के बीच की अनोखी बॉन्डिंग लोगों का ध्यान खींच रही है. रूपम मालिनी को सिर्फ एक हाथी नहीं मानते, बल्कि उसे अपने परिवार के सदस्य और बच्चों की तरह प्यार करते हैं.

वो उसकी हर जरूरत का ध्यान रखते हैं. मालिनी भी अपने महावत के साथ बेहद सहज नजर आती है. कभी वो रूपम के पीछे-पीछे चलती है, तो कभी उनके साथ खेलती दिखाई देती है. एलीफेंट पोंड में नहाते समय उसकी मस्ती देखते ही बनती है. पानी में उतरकर मालिनी जिस तरह अठखेलियां करती है, उसे देखकर कैंप में मौजूद लोग भी खुश हो जाते हैं.

जब मालिनी को कालागढ़ लाया गया था, तब उसके शरीर पर कई घाव थे. उसकी हालत अच्छी नहीं थी, लेकिन लगातार उपचार और देखभाल के बाद आज वो पूरी तरह स्वस्थ है. मालिनी मेरे लिए सिर्फ एक हाथी नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा है. मैं उसकी देखभाल अपने बच्चों की तरह करता हूं.“- रूपम, महावत

वन विभाग के लिए गर्व की बात है मालिनी का स्वस्थ होना: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के मुताबिक, किसी ऐसे वन्यजीव को बचाना जो जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहा हो, वन विभाग की पूरी टीम के लिए गर्व की बात है. यह वन विभाग के लिए उपलब्धि भी है.

कॉर्बेट में जंगली हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ विभागीय हाथियों की देखभाल और रेस्क्यू किए गए हाथियों के उपचार पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है. मालिनी इसका एक उदाहरण है. गंभीर हालत में रेस्क्यू की गई हथिनी को उपचार और बेहतर देखभाल के बाद स्वस्थ करना वन विभाग की टीम की बड़ी उपलब्धि है.“- साकेत बडोला, निदेशक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व

हाथी सिर्फ वन्यजीव नहीं, जंगल के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण: वन्यजीव प्रेमी गणेश रावत का कहना है कि हाथी धरती पर चलने वाला सबसे बड़ा जीव होने के साथ-साथ इंसान के साथ अपने पुराने और गहरे रिश्ते के लिए भी जाना जाता है. इतिहास में राजा-महाराजाओं के समय से ही इंसान और हाथियों के बीच एक खास संबंध रहा है.

मालिनी की कहानी भी इंसान और हाथी के इसी रिश्ते का आधुनिक उदाहरण है. संकट में फंसी एक नन्ही हथिनी को रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित वातावरण देना और उसकी देखभाल करना वन्यजीव संरक्षण की संवेदनशील तस्वीर पेश करता है. गणेश रावत का कहना है कि,

उत्तराखंड हाथियों की दृष्टि से बेहद समृद्ध प्रदेश है. यहां का प्राकृतिक वातावरण हाथियों के लिए अनुकूल है. हाथी जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. वे न केवल प्रदेश की प्राकृतिक पहचान हैं, बल्कि देश की जैव विविधता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.“- गणेश रावत, वन्यजीव प्रेमी

मालिनी बनी संरक्षण और संवेदनशीलता की मिसाल: मालिनी की कहानी सिर्फ एक हाथी के रेस्क्यू की कहानी नहीं है. यह उस संवेदनशीलता की कहानी है, जिसमें वन विभाग के कर्मचारी किसी संकट में फंसे वन्यजीव को बचाने के लिए लगातार मेहनत करते हैं. मालन नदी के तेज बहाव में बहकर चट्टानों के बीच फंसी नन्ही हथिनी से लेकर आज कालागढ़ एलीफेंट सेंटर में अठखेलियां करती है.

मालिनी तक का सफर आसान नहीं था. उसके शरीर पर घाव थे, हालत गंभीर थी और जीवन बचाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन वनकर्मियों, महावतों और वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ दुष्यंत शर्मा की टीम मेहनत ने उसकी जिंदगी बदल दी. आज मालिनी स्वस्थ है. वो अपने महावत रूपम के साथ खेलती है. पानी में नहाती है और सेंटर में आने वाले लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाती है.
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